हमारा त्रिएक परमेश्वर | Hamara Triyek Parmeshwar

Bro. Deva

यह वेबसाइट आत्मिक जीवन एवं परमेश्वर के सामर्थ में बढ़ने, आलौकिक एवं जयवन्त मसीह जीवन जीने, परमेश्वर के वचन को सरलता एवं गहराई से समझने में मदद करेगी। यदि आप परमेश्वर, प्रभु यीशु मसीह के वचन को समझने के लिये भूखे और प्यासे हैं तो मेरा विश्वास है कि यह वेबसाईट आपके लिये सहायक सिद्ध होगी।

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त्रिएक परमेश्वर कौन है?

आज हम त्रिएकत्व परमेश्वर के विषय में अध्ययन करेंगे। मेरे प्रियों जब आप पवित्र शास्त्र का अध्ययन करते हैं तो आपको त्रिएक या त्रिएकत्व शब्द कहीं दिखाई नहीं देगा, परन्तु जब आप सावधानी पूर्वक अध्ययन करते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि परमेश्वर तीन व्यक्तियों के रूप में विद्यमान है, अर्थात परमेश्वरत्व तीन व्यक्तियों में प्रकट होता है।यदि आप इस कठिन सिद्धांत को समझने में कठिनाई महसुस करते हैं तो आप निराश न हों, क्योंकि आप त्रिएकत्व को पूरी तरह समझने का प्रयास करेंगे तो हो सकता है कि मानसिक संतुलन खो बैठे, किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि आप इस पर विश्वास न करें। त्रिएक परमेश्वर पर विश्वास करना परम आवश्यक है। आप त्रिएक परमेश्वर पर विश्वास करके परमेश्वर का आदर करते हैं। पिता भी परमेश्वर है, प्रभु यीशु भी परमेश्वर है और पवित्र आत्मा भी परमेश्वर है क्योंकि तीनों के गुण एक सामान है। यदि आपने परमेश्वर के स्वाभाविक गुण के विषय में अध्ययन नहीं किया तो आगे पेज में पढ़ सकते हैं। आईये हम नीचे लिखे विषय वस्तु के द्वारा त्रिएकत्व परमेश्वर को जानने का प्रयास करते हैं।

01. त्रिएकत्व का आधार।
02. सृष्टि करने में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।
03. देहधारण में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।
04. छुटकारे में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।
05. उद्धार में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।
06. सहभागिता में त्रिएक परमेश्वर कार्य।
07. प्रार्थना में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।
08. महिमा में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।
09. पुनरूत्थान में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।

 

01. त्रिएकत्व का आधार –

परमेश्वर के त्रिएकत्व के आधार को समझने के लिये आईये हम परमेश्वर के वचन का अध्ययन करते हैं – यदि हम प्रभु यीशु मसीह के बपतिस्मा लेने की घटना को पढ़ते हैं तो वहां हम त्रिएकत्व को कार्य करते हुये स्पष्ट रूप से देखते हैं –

मत्ती 03ः16-17 -‘‘और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया; और उस ने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर की नाईं उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं॥”

अब यदि आप इस वचन पर सावधानी पूर्वक ध्यान देंगे तो पायेंगे कि परमेश्वर पिता स्वर्ग से बोलता है कि ‘‘यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं’’। परमेश्वर पुत्र, हमारे प्रभु यीशु मसीह का बपतिस्मा हो रहा था और परमेश्वर पवित्र आत्मा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के उपर कबूतर की नाई उतरा। यदि हम बपतिस्मे की कार्य प्रणाली को देखे तो भी प्रभु यीशु ने पिता, पुत्र पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा देने का आदेश दिया है, आईये हम परमेश्वर के वचन को पढ़ते हैं……..

मत्ती 28ः19 –  “इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।” आशीष की प्रार्थना में भी हम त्रिएक परमेश्वर के आधार को देखते हैं।

02 कुरून्थियों 13ः14“प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे॥”

आईये हम एक और परमेश्वर के वचन को पढ़ते हैं जहां परमेश्वर के त्रिएक का पहला संकेत मिलता है। (उत्पत्ति 01ः26 – “फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।”)

इस वचन में परमेश्वर ने मनुष्य की रचना करते समय ‘‘मैं’’ के स्थान पर ‘‘हम’’ सर्वनाम का उपयोग किया है, अर्थात परमेश्वर यहां अकेला नहीं है, परमेश्वर के साथ प्रभु यीशु मसीह और पवित्र आत्मा उपस्थित है और यही हमें त्रिएक परमेश्वर का पहला संकेत मिलता है।

02. सृष्टि करने में त्रिएक परमेश्वर का कार्य –

परमेश्वर-पिता ने बोला – ( उत्पत्ति 1ः3 – “तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। “) पिता परमेश्वर के मुंह से जो वचन निकला वह परमेश्वर पुत्र था।

परमेश्वर-पुत्र वह वचन था जो बोला गया ( यूहन्ना 01ः01 – “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।”) ( यूहन्ना 01ः14 – “और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।”) अर्थात परमेश्वर के मुंह से जो वचन निकला वह कार्यशील हुआ और कार्यशील होकर उजियाला किया, वचन प्रभु यीशु मसीह है जो देहधारी हुआ।

परमेश्वर-पवित्र आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। (उत्पत्ति 01ः02 – “और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।”) अर्थात सृष्टि के समय परमेश्वर -पवित्र आत्मा भी कार्यशील था।

03. देहधारण में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।

परमेश्वर-पिता ने अपना एकलौता पुत्र दिया। (यूहन्ना 03ः16 – “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”)

परमेश्वर-पुत्र संसार में उत्पन्न हुआ था। (लूका 02ः11 – “कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।”)

परमेश्वर-पवित्र आत्मा मरियम पर गर्भ धारण के लिये उतरा। (लूका 01ः35 – “स्वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।”)

04. छुटकारे में त्रिएक परमेश्वर का कार्य-

इब्रानियों 09ः14“तो मसीह का लोहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो।”

परमेश्वर-पिता ने क्रूस का बलिदान स्वीकार किया। इसिलये तो परमेश्वर ने प्रभु यीशु को मरे हुये में से जिलाया जिससे हम छुटकारा पाये। (इब्रानियों 09ः14)

परमेश्वर-पुत्र ने अपने आप को हमारे लिये अर्पित कर दिया ताकि हम अपने पापो से छुटकारा पाये। (इब्रानियों 09ः14)

परमेश्वर-पवित्र आत्मा – प्रभु यीशु मसीह ने अपने आप को सनातन आत्मा अर्थात पवित्र आत्मा के द्वारा अर्पित किया। (इब्रानियों 09ः14)

05. उद्धार में त्रिएक परमेश्वर का कार्य।

परमेश्वर-पिता ने दूर देश से लौटे उड़ाऊ पुत्र को ग्रहण किया। (लूका 15ः22“परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; फट अच्छे से अच्छा वस्त्र निकालकर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।”) पिता पापी का स्वागत करता है, उसे क्षमा करता है, उसे वस्त्र और अंगूठी पहनाता है तथा एक भोज देता है।

परमेश्वर-पुत्र वह चरवाहा है जो खोई हुई भेड़ को ढूंढने जाता है। (लूका 15ः4 – “तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे?”)परमेश्वर – पुत्र हर एक की चिंता करता है और चाहता है कि कोई भी नाश न हो, परंतु सत्य को जानकर अनन्त जीवन को प्राप्त करें।

परमेश्वर- पवित्रात्मा नये विश्वासी पर मुहर लगाता है। (इफिसियों 1ः13 – “और उसी में तुम पर भी जब तुम ने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। वह उसके मोल लिए हुओं के छुटकारे के लिये हमारी मीरास का बयाना है, कि उस की महिमा की स्तुति हो॥”)

मेरे प्रियों जब हम सत्य का वचन सुनते हैं और उस पर विश्वास करते हैं तो परमेश्वर पिता और परमेश्वर पुत्र की ओर से पवित्र आत्मा की छाप लगती है। परमेश्वर पवित्र आत्मा हमारे मीरास का बयाना है जो हमें भविष्य में स्वर्ग राज्य में मिलने वाला है। पवित्र आत्मा के द्वारा आप स्वर्ग की शांति और आनन्द को प्राप्त कर सकते हैं अर्थात पवित्र आत्मा से परिपूर्ण जीवन के द्वारा आप स्वर्गीय जीवन का स्वाद चख सकते हैं और प्रत्येक विश्वासियों को इस स्तर को प्राप्त करना है।

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06. सहभागिता में त्रिएक परमेश्वर कार्य-

परमेश्वर-पिता हमें सहभागिता के लिये अपने पास आने का निमन्त्रण देता है। (इफिसियों 02ः18 – “क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।”) यहूदी हो या अन्यजाति परमेश्वर ने दोनो के लिये एक ऐसा मार्ग निकाला है जिससे हमारी पहुंच पिता तक है। अर्थात प्रभु यीशु के लहू से हम शुद्ध किये गये और पवित्र आत्मा के द्वारा मसीह में हमारी पहुंच पिता तक होती है।

परमेश्वर-पुत्र हमारा मेल-मिलाप है। (02 कुरूं 5ः19 – “अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है॥”) मेरे प्रियों परमेश्वर अनुग्रहकारी परमेश्वर है। उसने हमारे पापों का दोष हम पर नहीं लगाया क्योंकि प्रभु यीशु मसीह ने मनुष्य जाति का पाप आप ही आपने ऊपर लेकर क्रूस पर चढ़ गया ताकि जो कोई प्रभु यीशु पर विश्वास करे वह अपने पापों से छुटकारा पाये। इस प्रकार प्रभु यीशु हमारा परमेश्वर से मेल मिलाप कराया है।

परमेश्वर- पवित्रआत्मा इस मिलाप और सहभागिता को कार्यान्वित करता है। (इफिसियों 02ः18 – “क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।”) पवित्र आत्मा ही हमें परमेश्वर की उपस्थिति में लेकर चलता है।

07. प्रार्थना में त्रिएक परमेश्वर का कार्य-

परमेश्वर-पिता निवेदनों को ग्रहण करता है। (यूहन्ना 16ः23 – “उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूं, यदि पिता से कुछ मांगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा।”)

परमेश्वर-पुत्र के नाम में हम प्रार्थनाएं करते हैं। ( यूहन्ना 16ः23 – “उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूं, यदि पिता से कुछ मांगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा।”)

परमेश्वर-पवित्र आत्मा प्रार्थना में हमारी अुगवाई करता है। (रोमियो 08ः26 – “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।”)

08. महिमा में त्रिएक परमेश्वर का कार्य-

परमेश्वर-पिता का अन्त में हजार वर्ष का राज्य होगा। (01कुरून्थियों 15ः24 – “इस के बाद अन्त होगा; उस समय वह सारी प्रधानता और सारा अधिकार और सामर्थ का अन्त करके राज्य को परमेश्वर पिता के हाथ में सौंप देगा।”)

परमेश्वर-पुत्र हमारी नाशवान देह को अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा। (फिलिप्पियों 3ः21 -“वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा॥”)

परमेश्वर-पवित्र आत्मा निमन्त्रण देता है। (प्रकाशित वाक्य 22ः17 – “और आत्मा, और दुल्हिन दोनों कहती हैं, आ; और सुनने वाला भी कहे, कि आ; और जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले॥”)

09. पुनरूत्थान में त्रिएक परमेश्वर का कार्य-

परमेश्वर-पिता नए नाम को महिमा (स्वर्ग) में अंकित करता है। (लूका 10ः20 – “तौभी इस से आनन्दित मत हो, कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इस से आनन्दित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं॥”)

परमेश्वर-पुत्र पाप को अपने बहुमूल्य लहू से शुद्ध करता है। (इफिसियों 1ः7 – “हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है।”)

परमेश्वर-पवित्रात्मा नए जन्म के आश्चर्यजनक परिवर्तन को कार्यान्वित करता है। (यूहन्ना 3ः3-7 “यीशु ने उस को उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता। नीकुदेमुस ने उस से कहा, मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो क्योंकर जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दुसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?  यीशु ने उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं; जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। अचम्भा न कर, कि मैं ने तुझ से कहा; कि तुम्हें नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।”)

मेरे प्रियों हमें परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिये नये सिरे से जन्म लेना आवश्यक है क्योंकि जल अर्थात बपतिस्मा और आत्मा अर्थात पवित्र आत्मा को प्राप्त करना है जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने से प्राप्त होता है।पिता परमेश्वर, प्रभु यीशु मसीह और पवित्र आत्मा आपको त्रिएकता को समझने में आत्मिक समझ प्रदान करें ताकि आप परमेश्वर की परिपूर्णता को समझ सकें।

आमीन।।

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