मसीह में जीवित एवं धन्य आशा | Masih Me Jeevit Aur Dhanya Aasha

Bro. Deva

यह वेबसाइट आत्मिक जीवन एवं परमेश्वर के सामर्थ में बढ़ने, आलौकिक एवं जयवन्त मसीह जीवन जीने, परमेश्वर के वचन को सरलता एवं गहराई से समझने में मदद करेगी। यदि आप परमेश्वर, प्रभु यीशु मसीह के वचन को समझने के लिये भूखे और प्यासे हैं तो मेरा विश्वास है कि यह वेबसाईट आपके लिये सहायक सिद्ध होगी।

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मेरे भाईयों एवं बहनों हम जानते हैं कि परमेश्वर ने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले सनातन काल से मसीह में चुन लिया है और अपने अनुगृह और उद्देश्य को यीशु मसीह में प्रकाशित भी किया। प्रभु यीशु मसीह मनुष्यों के पापों के लिये मारे गये, गाड़े गये और तीसरे दिन मरे हुये में से महिमायुक्त देह में जी उठे और हमें जीवित एवं धन्य आशा का भागी बनाया है। मेरे प्रियों यदि हमने इस भौतिक जीवन के लिये ही मसीह से आशा रखी है तो, और भी सब लोगों से अधिक अभागे हैं, ये हमारी नासमझी और अज्ञानता है और हमें अभी प्रभु यीशु को जानने और समझने की जरूत है। (01 कुरून्थियों 15ः19 – “यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं”)।
जब हम यीशु प्रभु पर विश्वास करते हैं तो हमारे पास जीवित एवं धन्य आशा है। संसार के लोग जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं करते हैं, अपनी वृद्ध अवस्था तक सारी आशाए खो देते हैं या आशाहीन हो जाते हैं, यद्यपी जवानी के दिनों में जो भी संसारिक वस्तुओं की आशा करते हैं, वह प्राप्त भी कर लेते हैं किन्तु जैसे-जैसे वृद्ध अवस्था की ओर बढ़ते जाते हैं उनके पास कोई आशा नहीं रहती है उनके लिये सब कुछ खत्म हो गया है। सुसमाचार के सत्य वचन पर विश्वास नहीं करने के कारण इस सत्य को नहीं जान पाते कि भौतिक या संसारिक देह को त्यागने के बाद स्वर्ग राज्य का जीवन या अनन्त जीवन भी है या कोई किसी माध्यम से स्वर्ग राज्य की आशा भी रखता है तो क्या उनकी आशा मसीह के बिना जीवित है ?
           मेरे प्रियों, आशा के विषय हम सुसमाचार में सुनते हैं (कुलुस्सियो 01ः5 – “उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो”) पौलुस प्रेरित हमें बार-बार आशा के विषय में सीखाते हैं क्योंकि हर एक विश्वासी या मसीही में विश्वास, प्रेम और आशा का गुण होना चाहिये, क्योंकि ये गुण मसीही जीवन के उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। पे्ररित पौलुस का यह मनपसंद विषय है। क्या हमारे पास उस धनी युवक के जैसा अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये चाहत या दृढ इच्छा है जो प्रभु यीशु से प्रश्न करता है कि हे उत्तम गुरू मैं अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये क्या करू ?(मरकुस 10ः17)
हमारे जीवन में जीवित एवं धन्य आशा कैसे है ? यीशु प्रभु यह कहकर वह उन के देखते-देखते ऊपर उठा लिया गया, यीशु प्रभु के जाते समय जब वे आकाश की ओर ताक रहे थे, तो देखो, दो पुरूष श्वेत वस्त्र पहिने हुये उन के पास आ खड़े हुए, और उनसे कहा ‘‘हे गलीली पुरूषों, तुम क्यों खड़े आकाश की ओर देख रहे हो ? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।’( प्रेरितों के काम की पुस्तक 1ः9-11) परमेश्वर का वचन हमें सीखता है कि प्रभु हमें वापस लेने आयेंगे।
इसी प्रकार जब प्रभु यीशु अपने लोगों को लेने आयेंगे तब क्या होगा, किस प्रकार की घटनाएं घटेगी इसका वर्णन हम ( 01 थिस्सलुनीकियो 04ः13-18 – “हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाईं शोक करो जिन्हें आशा नहीं। क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा”।) में भी पढ़ते हैं।
हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, जिसने यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया है, “अर्थात एक अविनाशी, और निर्मल, और अजर मीरास के लिये जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिनकी रक्षा परमेश्वर की सामर्थ्य से विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। इस कारण तुम मगन होते हो यद्यपि अवश्य है कि अभी कुछ दिन के लिये नाना प्रकार के परीक्षाओ के कारण दुःख में हो”……..(01 पतरस 01ः3-6)। यह वचन हमें बताता है कि परमेश्वर ने अपनी बड़ी दया हम पर प्रगट की है और हमें दण्ड से बचाने लिये अपने इकलौते पुत्र को हमारे लिये दे दिया है और हमें आत्मिक रूप से जिंदा करके नया जन्म देकर हमें जीवित आशा दिया है, अर्थात अनन्त जीवन जो कभी भी नाश नहीं होगा, पवित्र होगा जिसमें पाप का कोई अधिकार नहीं रहेगा, और कभी मिटने वाला जीवन नहीं है। हमारी ये जीवित आशा स्वर्ग में है। हमारे लिये अति आनन्दित होने वाली बात है कि इस वर्तमान संसार में परमेश्वर हमारी रक्षा करता है ताकि हम अपने पूर्ण उद्धार को पा सके, किन्तु परमेश्वर की सुरक्षा में रहने का एक ही शर्त है कि हम प्रभु यीशु मसीह पर जीवित विश्वास बनाये रखें। जितना ज्यादा हम प्रभु में बढ़ते जाते हैं या जीवित विश्वास को बढ़ाते है तो हमारे जीवन में परमेश्वर की सामर्थ्य उतना ज्यादा काम करती है और हर वो पाप, दुष्टात्मा का प्रभाव, शारीरिक अभिलाषाएं, मन की इच्छाएं और सब प्रकार की बातें जो हमारे उद्धार को नाश करने का काम करते हैं से सुरक्षा करती है। मेरे प्रियों हम वर्तमान समय में भले ही दुःख उठाये या नाना प्रकार के क्लेश व परेशानी हों परंतु हमारे लिये भविष्य में एक जीवित आशा है जो प्रेरणा देती है कि वर्तमान में सब दुःखो को सह ले।
मेरे प्रिय भाईयों बहनो हम उस जीवित एवं धन्य आशा की, “और उस धन्य आशा की अर्थात अपने महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें” (तीतुस 2ः13)। हम जानते हैं यदि मसीह मुर्दे में जी नहीं उठते तो हमारे पास कोई आशा नहीं होती। हमारा विश्वास करना व्यर्थ होता और हम अपने पापों में ही फंसे होते। पर परमेश्वर को धन्यवाद हो कि प्रभु यीशु मसीह को मरे हुये में जिलाकर अपने सनातन काल के उद्देश्य और अनुगृह को हम पर प्रगट किया है।
           मेरे प्रियों इस वर्तमान संसार में परमेश्वर की सामर्थ्य हमारे विश्वास के द्वारा हमारे जीवन में काम करता है साथ ही प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर के दाहिने विराजमान होकर सदैव हमारे लिये विनती करते हैं। इसलिये हमारी आशा पूर्ण होना शत प्रतिशत निश्चित है, हम अपने आप को पवित्र बनाते जाए।
आमीन।

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