परमेश्वर के 10 नैतिक गुण | 10 Parmeshwar Ke Naitik Gunn

Bro. Deva

यह वेबसाइट आत्मिक जीवन एवं परमेश्वर के सामर्थ में बढ़ने, आलौकिक एवं जयवन्त मसीह जीवन जीने, परमेश्वर के वचन को सरलता एवं गहराई से समझने में मदद करेगी। यदि आप परमेश्वर, प्रभु यीशु मसीह के वचन को समझने के लिये भूखे और प्यासे हैं तो मेरा विश्वास है कि यह वेबसाईट आपके लिये सहायक सिद्ध होगी।

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मेरे प्रियो आपने पहला लेख ‘‘परमेश्वर के स्वाभाविक गुण’’ के विषय में पढ़ा होगा यदि नहीं पढ़ा है तो अवश्य पढ़े आप परमेश्वर के बारे में और जान पाएंगे। वहां पर हमने स्वाभाविक गुण के बारे में अध्ययन किया है, जो केवल परमेश्वर के पास ही है साथ ही गुण क्या है ? परमेश्वर के गुण क्यों जानना चाहिये ? इस विषय पर भी लेख है। अब हम आगे परमेश्वर के नैतिक गुण के विषय में अध्ययन करेंगे। मैं आपको बताना चाहता हूं कि परमेश्वर ने नैतिक गुण को मनुष्यों के साथ साझा किया है, और ये गुण मनुष्यों में भी पाये जाते हैं और होना भी चाहिये। आइये हम परमेश्वर के नैतिक गुणों को क्रमवार जानेंगे:-

परमेश्वर के 10 नैतिक गुण:-

  1. परमेश्वर पवित्र है।
  2. परमेश्वर धर्मी है।
  3. परमेश्वर दयालू है।
  4. परमेश्वर प्रेम है।
  5. परमेश्वर विश्वासयोग्य परमेश्वर है।
  6. परमेश्वर धीरजवन्त है।
  7. परमेश्वर करूणामय परमेश्वर है।
  8. परमेश्वर अनुग्रहकारी परमेश्वर है।
  9. परमेश्वर भला परमेश्वर है।
  10. परमेश्वर सच्चा परमेश्वर है।

01. परमेश्वर पवित्र है:-

पवित्र शास्त्र बाईबल बताती है कि यहोवा परमेश्वर पवित्र है, क्योंकि वह स्वभाव से पवित्र है और हर मामले में शुद्ध है। परमेश्वर जो भी कार्य करता है, वह शुद्ध और पवित्र है। आइये हम परमेश्वर के वचन से देखते हैं –
निर्गमन 15ः11 ‘‘ हे यहोवा, देवताओं में तेरे तुल्य कौन है? तू तो पवित्रता के कारण महाप्रतापी, और अपनी स्तुति करने वालों के भय के योग्य, और आश्चर्य कर्म का कर्त्ता है॥”
01 शमुएल 02ः02 ‘‘ यहोवा के तुल्य कोई पवित्र नहीं, क्योंकि तुझ को छोड़ और कोई है ही नहीं; और हमारे परमेश्वर के समान कोई चट्टान नहीं है॥”
यशायाह 06ः03‘‘ और वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है।”
लैव्यवस्था 19ः02‘‘इस्त्राएलियों की सारी मण्डली से कह, कि तुम पवित्र बने रहो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा पवित्र हूं।”
01 पतरस 01ः15-16 “पर जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चालचलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, “पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।”
हमारा परमेश्वर पवित्र परमेश्वर है। मेरे प्रियों इससे पहले कि वह विश्वासयोग्य है, दयालू है, प्रेमी है वह सबसे पहले पवित्र है। इसलिये हमें भी अपने परमेश्वर के जैसा पवित्र बनना है। हम यहां ये भी समझ लेते हैं कि पवित्र या पवित्रता का मतलब मनुष्यों के लिये क्या है ? बाईबल में इंसानों (निर्ग 19ः6), जानवरों (गिनती 18ः17), चीजों (निर्ग 28ः38, 30ः25, लैव 27ः14), जगहों (निर्ग 3ः5, यश 27ः13), समय के दौर (निर्ग 16ः23, लैव 25ः12) और बाकी कामों (निर्ग 36ः4) को “पवित्र” कहा गया है, तो इसके मूल इब्रानी शब्द का मतलब है अलग किया गया, एक खास मकसद के लिए ठहराया गया या पवित्र परमेश्वर के लिए अलग किया गया, परमेश्वर की सेवा के लिए समर्पित होना। मसीही यूनानी शास्त्र में भी “पवित्र” और “पवित्रता” का मतलब है, परमेश्वर के लिए अलग किया गया। ये शब्द एक इंसान के शुद्ध चाल चलन के लिए भी इस्तेमाल हुए हैं।

02. परमेश्वर धर्मी है:-

परमेश्वर धर्मी है क्योंकि वह हर एक काम को धार्मिकता और न्याय से करता है। मेरे प्रियों जब मनुष्य के साथ अन्याय होता है तब वह धार्मिकता से होने वाले न्याय की मांग करता है। आईये वचनों को देखते हैं-
  •  परमेश्वर पक्षपात नहीं करता – प्रे0काम0 10ः34 ‘‘तब पतरस ने मुंह खोलकर कहा; अब मुझे निश्चय हुआ, कि परमेश्वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन हर जाति में जो उस से डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है।”
  •  वह दूसरों के प्रति होने वाले दुर्व्यवहार के विरुद्ध आज्ञा देता हैजकर्याह 7ः8-10 “फिर यहोवा का यह वचन जकर्याह के पास पहुंचा, सेनाओं के यहोवा ने यों कहा है, खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना, न तो विधवा पर अन्धेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर ; और न अपने अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना।”
  • वह धार्मिकता से न्याय करता है02 थिस्लुनिकिया 01ः06 ‘‘ क्योंकि परमेश्वर के निकट यह न्याय है, कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे।” रोमियों 12ः19 “हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।”
  • वह हर एक अच्छे काम का धामिर्कता से प्रतिफल देता है:- इब्रानियो 06ः10– ‘‘ क्योंकि परमेश्वर अन्यायी नहीं, कि तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की, और कर भी रहे हो।”
  • वह दण्ड देने में भी धर्मी हैकुलुस्सियों 03ः25 – “क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।”

03. परमेश्वर दयालू है:-

परमेश्वर दयालू है। इसके साथ वह न्यायी भी है। आईये कुछ वचनों एवं उदाहरण से परमेश्वर के दयालूता के बारे में पढ़े –
भजन संहिता 103ः08 ‘‘ यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।”
व्यवस्थाविवरण 04ः31‘‘ क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा दयालु ईश्वर है, वह तुम को न तो छोड़ेगा और न नष्ट करेगा, और जो वाचा उसने तेरे पितरों से शपथ खाकर बान्धी है उसको नहीं भूलेगा।”
भजन संहिता 86ः15 ‘‘ परन्तु प्रभु, तू दयालु और अनुग्रहकारी परमेश्‍वर है, तू विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है।”
रोमियो 09ः18 ‘‘ सो वह जिस पर चाहता है, उस पर दया करता है; और जिसे चाहता है, उसे कठोर कर देता है।”
               मेरे प्रियों हमारा परमेश्वर दयालू भी और न्यायी भी है। वह दया भी करता है, किन्तु वह अपने न्याय करने वाले गुण को नहीं भूल सकता है। आप इस उदाहरण से समझिये कि यीशु ने क्रूस पर हमारे लिए क्या हासिल किया है। दो लोगों ने स्कूल और महाविद्यालय में एक साथ पढ़ाई की और गहरी दोस्ती बनाई। जिन्दगी चलती रही और वे अपने अपने मार्गों पर चले गए और उनका संपर्क टूट गया। एक न्यायधीश बनने चला गया, जबकि दूसरे का जीवन गिरता गया और अंत में वह एक अपराधी बन गया। एक दिन एक अपराधी न्यायधीश के सामने उपस्थित हुआ। उसने एक अपराध किया था जिसके लिए उसे दोषी पाया गया। न्यायधीश ने अपने पुराने दोस्त को पहचान लिया और असमंजस में पड़ गया।
वह एक न्यायधीश था इसलिए उसे न्याय करना जरूरी था। वह उस व्यक्ति को यूँ ही जाने नहीं दे सकता था। दूसरी तरफ, वह दयालु बनना चाहता था, क्योंकि उसने अपने दोस्त से प्यार किया था। इसलिए उसने अपराध करने के लिए उस पर उचित जुर्माना लगाया। यह न्याय था, फिर वह न्यायधीश की अपनी पदवी से नीचे आया और जुर्माने की राशी का एक चेक लिख कर दे दिया – यह कहते हुए कि वह उसकी तरफ से जुर्माना भरेगा। यह दया, प्रेम और बलिदान था।
यह वर्णन ठीक वैसा नहीं है। हमारा अपराध इससे भी बुरा था, और हमें दंड के रूप में मृत्यु का सामना करना पड़ता। पर यह संबंध और भी करीब है, इस संसार के माता – पिता अपने बच्चों से जितना प्यार करते हैं उससे कहीं ज्यादा स्वर्ग में आपके पिता आप से प्यार करते हैं।

04. परमेश्वर प्रेम है:-

परमेश्वर प्रेम है। जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है। यदि कोई कहे कि मैं परमेश्वर को जानता हूं और प्रेम न रखे तो वह झूठा है। आईये पवित्र शास्त्र से कुछ वचनोें को देखते हैं:-

01 यूहन्ना 04ः08-16‘‘जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उस ने अपने आत्मा में से हमें दिया है। और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है। जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।”
यूहन्ना 03ः16  “क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नष्‍ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”
01 यूहन्ना 03ः16-18 –  ‘‘हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।”
यूहन्ना 16ः27 –  “क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया।”

05. परमेश्वर विश्वासयोग्य परमेश्वर है-

हमारा परमेश्वर विश्वासयोग्य परमेश्वर है। हम बदल जाए तो बदल जाए पर परमेश्वर कभी भी अपने आप से इन्कार नहीं कर सकता। जो कोई परमेश्वर से प्रेम करता है और उसके आज्ञाओं को मानता है, उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा को पालता है। आईये पवित्र शास्त्र से कुछ वचनो को देखते हैं:-
01 कुरिन्थियों 01ः09 –‘‘परमेश्वर सच्चा है; जिस ने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है॥”
02 तीमुथियुस 02ः13 – ‘‘यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वास योग्य बना रहता है, क्योंकि वह आप अपना इन्कार नहीं कर सकता॥”
व्यवस्थाविवरण 7ः09 –‘‘इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है”
व्यवस्थाविवरण 32ः04 – ‘‘वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है॥”

06. परमेश्वर धीरजवन्त है:-

हमारा परमेश्वर धीरजवन्त परमेश्वर है। यदि परमेश्वर धीरजवन्त नहीं होता तो सब उसके कोप के भागी होते। परमेश्वर हमारे अपराधों को क्षमा करता है  और हजार पीढ़ियों तक करूणा करता रहता है। ऐसा परमेश्वर जो बाईबल का परमेश्वर है और कोई नहीं हो सकता। बाईबल का परमेश्वर ही सच्चा परमेश्वर है।
गिनती 14ः18‘‘कि यहोवा कोप करने में धीरजवन्त और अति करूणामय है, और अधर्म और अपराध का क्षमा करनेवाला है, परन्तु वह दोषी को किसी प्रकार से निर्दोष न ठहराएगा, और पूर्वजों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों, और पोतों, और परपोतों को देता है।”
मीका 07ः18‘‘तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहां है जो अधर्म को क्षमा करे और अपने निज भाग के बचे हुओं के अपराध को ढांप दे? वह अपने क्रोध को सदा बनाए नहीं रहता, क्योंकि वह करूणा से प्रीति रखता है।”
भ0सं0 145ः08   ‘‘यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है।”
निर्गमन 34ः6-7‘‘और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है।”

07. परमेश्वर करूणामय परमेश्वर है –

मेरे प्रियों हमने परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में कैसे बढ़े ? वाले लेख में करूणा के विषय में पढ़ा था कि कृपा या करूणा वह भावना है जब हम किसी दूसरे की पीढ़ा या दुःख या परेशानी को देखते है वह कोई भी परेशानी हो चाहे मानसिकए शारीरिकए आत्मिकए सामाजिकए आर्थिकए पारिवारिक एवं अन्य कोई भी परेशानी या समस्या हो तो वह पीढ़ा या परेशानी जब हम स्वयं महसुस करते हैं और बोझ के साथ उस पीढ़ा या परेशानी को दूर करने की जो भावना जागृत होती हैए यही कृपा या करूणा है। हमारा परमेश्वर भी करूणामयी परमेश्वर है। आईये हम कुछ वचनो को देखते हैं:-
01 राजा 08ः23 ‘‘हे इस्राएली राष्‍ट्र के प्रभु परमेश्‍वर! तेरे समान न ऊपर आकाश में, और न नीचे पृथ्‍वी पर कोई ईश्‍वर है। अपने सेवकों के प्रति, जो अपने सम्‍पूर्ण हृदय से तेरे सम्‍मुख निष्‍ठापूर्वक चलते हैं, तू अपने विधान का पालन करता है। तू उन पर करुणा करता है।”
व्यवस्थाविवरण 7ः09‘‘इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है”
दानिय्येल 09ः4‘‘ मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है।”

08. परमेश्वर अनुग्रहकारी परमेश्वर है:-

हमारा परमेश्वर अनुगृहकारी परमेश्वर है। अनुग्रह का अर्थ है हम जिस योग्य नहीं होते वह आशीष या वस्तु या कोई चीज परमेश्वर हमें देता है जिसकी कीमत हमने न चुकाई हो। हमारा उद्धार अनुग्रह ही से हुआ है। हमने अपने उद्धार के लिये कोई कीमत नहीं चुकाई है। जबकि परमेश्वर का ही अनुग्रह है कि जब हम पापी ही थे तब मसीह हमारे लिये मरे।
भजन संहिता 116ः05 ‘‘यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है।”
नहेम्याह 09ः17 -‘‘और आज्ञा मानने से इन्कार किया, और जो आश्चर्यकर्म तूने उनके बीच किए थे, उनका स्मरण न किया, वरन् हठ करके यहाँ तक बलवा करनेवाले बने, कि एक प्रधान ठहराया, कि अपने दासत्व की दशा में लौटे। परन्तु तू क्षमा करनेवाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करनेवाला, और अति करुणामय परमेश्वर है, तूने उनको न त्यागा।”
योना 04ः02‘‘और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।”

09. परमेश्वर भला परमेश्वर है –

हमारा परमेश्वर भला परमेश्वर है। मनुष्यों के लिये परमेश्वर के मन में जो भी विचार उत्पन्न होते हैं वह भलाई और कुशल की ही होती है। वह मनुष्यों को दुःख देकर खुश नहीं होता।
भजन संहिता-25:08 – ‘‘ यहोवा भला और सीधा हैइसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।”
भजन संहिता – 119ः68 – ‘‘ तू भला है, और भला करता भी है; मुझे अपनी विधियां सिखा।”
भजन संहिता – 106ः01 – ‘‘याह की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है!”
भजन संहिता – 107ः01 – ‘‘यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है!”

10. परमेश्वर सच्चा परमेश्वर है –

मेरे प्रियो हम जिस परमेश्वर की भक्ति करते हैं वह ही सच्चा परमेश्वर है। यहोवा परमेश्वर के अलावा कोई दूसरा परमेश्वर नहीं है। आप धन्य है जो सच्चे परमेश्वर की आराधना करते हैं।
01 कुरिन्थियों 01ः09 ‘‘ परमेश्वर सच्चा है; जिस ने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है॥”
02 थिस्लुनिकियो03ः03‘‘परन्तु प्रभु सच्चा है; वह तुम्हें दृढ़ता से स्थिर करेगा: और उस दुष्ट से सुरक्षित रखेगा।”
यिर्मयाह -10ः10‘‘ परन्तु यहोवा वास्तव में परमेश्वर है; जीवित परमेश्वर और सदा का राजा वही है। उसके प्रकोप से पृथ्वी कांपती है, और जाति जाति के लोग उसके क्रोध को सह नहीं सकते।”
व्यवस्थाविवरण 32ः04‘‘वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है॥”
निष्कर्ष:- उससे प्रेम करो। उसकी आराधना करो। उसकी सेवा करो। उसकी आज्ञा मानो। उससे डरो।
आमीन।

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