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2 तीमुथियुस अध्याय 3 प्रश्नोत्तरी प्रश्न और उत्तर | 2 Timothy Chapter 3 Quiz Questions And Answers

प्रेरितों के काम अध्याय 17 प्रश्नोत्तरी प्रश्न और उत्तर

मेरे प्रिय भाई और बहनों, हमारी हृदय से गुजारिश है कि आप बाईबल क्विज अटेंड करने से पहले एक बार इस चैप्टर का अध्ययन जरूर कर लें। बाईबल क्विज के माध्यम से हमारा उद्देश्य आपको परमेश्वर के वचन को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि आप परमेश्वर और उसके ज्ञान को जान और समझ सके। हमारा पूर्ण विश्वास है कि आप निश्चित रूप से आशीषीत होंगे। कृपया नीचे दिए गए फिनिश ऑप्शन पर क्लिक करने से पहले सभी प्रश्न अटेंड करना अनिवार्य है। हम आपको शुभकामनाएं देते हैं।

 

#1. इस वचन को पूरा करें – “मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी …………… का विरोध करते हैं

उत्तर का संदर्भ:- और जैसे यन्नेस और यम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्य का विरोध करते हैं: ये तो ऐसे मनुष्य हैं, जिन की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है और वे विश्वास के विषय में निकम्मे हैं। (02 तीमुथियुस 03:08)

#2. 02 तीमुथियुस 03 अध्याय के अनुसार पवित्रशास्त्र क्यों रचा गया है ?

उत्तर का संदर्भ:- ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए॥ (02 तीमुथियुस 03:17)

#3. 2 तीमुथियुस 03 अध्याय के अनुसार पौलुस तीमुथियुस को यह स्मरण रख कि अन्तिम दिनों में कैसे समय आएंगे कहा ?

उत्तर का संदर्भ:- पर यह जान रख, कि अन्तिम दिनों में कठिन समय आएंगे। (02 तीमुथियुस 03:01)

#4. पौलुस तीमुथियुस को कब से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है कहते हैं ?

उत्तर का संदर्भ:- और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। (02 तीमुथियुस 03:15)

#5. मूसा का विरोध किन्होंने किया था ?

उत्तर का संदर्भ:- और जैसे यन्नेस और यम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्य का विरोध करते हैं: ये तो ऐसे मनुष्य हैं, जिन की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है और वे विश्वास के विषय में निकम्मे हैं। (02 तीमुथियुस 03:08)

#6. पौलुस अंतिम दिनों में ऐसे मनुष्य जो भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उसकी शक्ति को न मानेंगे, ऐसों से क्या रहने के लिये कहते हैं ?

उत्तर का संदर्भ:- वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना। (02 तीमुथियुस 03:05)

#7. पवित्रशास्त्र किन-किन बातों के लिये लाभदायक हैं ?

उत्तर का संदर्भ:- हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। (02 तीमुथियुस 03:16)

#8. 02 तीमुथियुस 3 अध्याय में दुर्बल स्त्रियों के बारे में क्या कहा गया है ?

उत्तर का संदर्भ:- इन्हीं में से वे लोग हैं, जो घरों में दबे पांव घुस आते हैं और दुर्बल स्त्रियों को वश में कर लेते हैं, जो पापों से दबी और हर प्रकार की अभिलाषाओं के वश में हैं। (02 तीमुथियुस 03:06)

#9. पौलुस के अनुसार अन्तिम दिनों में मनुष्य कैसे हो जाएंगे जिससे कठिन समय आएंगे ?

उत्तर का संदर्भ:- क्योंकि मनुष्य अपस्वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता-पिता की आज्ञा टालने वाले, कृतघ्न, अपवित्र। दयारिहत, क्षमारिहत, दोष लगाने वाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी। विश्वासघाती, ढीठ, घमण्डी, और परमेश्वर के नहीं वरन सुखविलास ही के चाहने वाले होंगे। वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहना।(02 तीमुथियुस 03:02-05)

#10. जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं, वे सब क्या किये जाएंगे ?

उत्तर का संदर्भ:- पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। (02 तीमुथियुस 03:12)

#11. पौलुस पर किन-किन स्थानों में दुःख आ पड़े थे जहां पर भी तीमुथियुस ने साथ दिया था ?

उत्तर का संदर्भ:- और ऐसे दुखों में भी जो अन्ताकिया और इकुनियुम और लुस्त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया। (02 तीमुथियुस 03:11)

#12. संपूर्ण पवित्रशास्त्र किसकी प्रेरणा से रचा गया है ?

उत्तर का संदर्भ:- हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। (02 तीमुथियुस 03:16)

#13. पौलुस तीमुथियुस को किन-किन बातों में मेरा साथ दिया कहते हैं ?

उत्तर का संदर्भ:- पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया। (02 तीमुथियुस 03:10)

#14. 02 तीमुथियुस 03 अध्याय के अनुसार किस प्रकार के लोग बिगड़ते चले जाएंगे ?

उत्तर का संदर्भ:- और दुष्ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे। (02 तीमुथियुस 03:13)

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