परमेश्वर के स्वाभाविक गुण | Parmeshwar ke Swabhavik Gunn

Bro. Deva

यह वेबसाइट आत्मिक जीवन एवं परमेश्वर के सामर्थ में बढ़ने, आलौकिक एवं जयवन्त मसीह जीवन जीने, परमेश्वर के वचन को सरलता एवं गहराई से समझने में मदद करेगी। यदि आप परमेश्वर, प्रभु यीशु मसीह के वचन को समझने के लिये भूखे और प्यासे हैं तो मेरा विश्वास है कि यह वेबसाईट आपके लिये सहायक सिद्ध होगी।

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आईये मेरे प्रियो हम परमेश्वर के स्वाभाविक गुण को जानते हैं, जो परमेश्वर होने के लिये स्वभावतः होना चाहिये जो परमेश्वर को अद्वितीय बनाता है। परमेश्वर अपने स्वभाविक गुण को किसी के साथ साझा नहीं किया है। यह गुण केवल परमेश्वर के पास है। हम परमेश्वर के स्वाभाविक गुण को जाने इससे पहले गुण क्या है ? हमें परमेश्वर के गुण को क्यों जानना चाहिये इस विषय को भी समझेंगे-
01. गुण क्या है ?
02. हमें परमेश्वर के गुण क्यों जानना आवश्यक है ?
03. परमेश्वर के स्वाभाविक गुण:-
  1. परमेश्वर अनन्त है।
  2. परमेश्वर अपरिवर्तनीय है।
  3. परमेश्वर सर्वशक्तिमान है।
  4. परमेश्वर सभी स्थानों पर एक ही समय उपस्थित रहता है (सर्वव्यापी)।
  5. परमेश्वर सर्वज्ञानी है।

01. गुण क्या है ?

        मेरे प्रियों किसी वस्तु या व्यक्ति की विशेषता, लक्षण या अद्वितीयता को गुण कहते हैं। अर्थात किसी व्यक्ति के गुण को जानकर ही हम ये जान पाते हैं कि वह व्यक्ति कैसा है। यदि आपको उसके गुण पसंद आते हैं तो आप उनसे दोस्ती कर लेते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और यदि किसी व्यक्ति के गुण पसंद नहीं आये तो आप उनसे दूरी बना लेते हैं। गुण के कारण ही किसी व्यक्ति की एक अलग पहंचान होती है। मेरे प्रियों मैं बताना चाहता हूं कि परमेश्वर के स्वभाविक अद्वितीय गुण है, जो केवल परमेश्वर के पास ही है। जिन्हे हम आगे क्रमवार समझेंगे।

02. हमें परमेश्वर के गुण क्यों जानना आवश्यक है ?

आपको परमेश्वर के गुण जानना इसलिये आवश्यक है, क्योंकि आप जितना ज्यादा परमेश्वर या परमेश्वर के गुणों को जानेंगे उतना ज्यादा आपकी भक्ति, आपकी आशा और आपका विश्वास बढ़ता और दृढ़ होता जाएगा। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं क्योंकि परमेश्वर है ही ऐसा। यदि आप परमेश्वर के गुणों को जान गये तो आपका मन परमेश्वर के साथ और बिताने को करेगा। आप जयवन्त और आलौकिक जीवन जियेंगे। मसीही जीवन आत्मिक जीवन है और आत्मिक जीवन जीने के लिये परमेश्वर को जानना जरूरी है। देखिये इस बात को हम पहले समझ लें कि परमेश्वर को हम पूरा नहीं समझ सकते। मनुष्य का दिमाग सीमित है, परंतु परमेश्वर असीमित है, वह समय में भी है और समय के बाहर भी है। परमेश्वर के लिये किसी चीज का कोई बंधन नहीं है। परमेश्वर ने अपने आप को पवित्र शास्त्र में जितना प्रगट किया है उतना तो हम समझ ही सकते हैं। बाईबल में परमेश्वर का वचन भी हमें सीखाता है –
यिर्मयाह 9:23-24  “यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता हे, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ।” 
इस वचन को पढ़कर तो आपको समझ आ गया होगा कि परमेश्वर की इच्छा क्या है और हमें क्या करना चाहिये ? मेरे प्रियों हमें हर समय इस बात को प्राथमिकता देना चाहिये कि मैं अपने जीवन में परमेश्वर को जान और समझ रहा हूं, आपका घमण्ड का कारण भी यही होना चाहिये की आप जीवित परमेश्वर को जानते और समझते हैं। आपके जीवन से परमेश्वर प्रसन्न होगा।

03. परमेश्वर के स्वाभाविक गुण

आईये हम परमेश्वर के स्वभाविक गुण को जानते हैं।

(1) वह अनन्त परमेश्वर है:-

सच्चा परमेश्वर होने के लिये यह गुण होना चाहिये कि, न तो उसका कोई आरम्भ है और न ही अंत। अगर किसी मनुष्य द्वारा कोई वस्तु बनाई जाती है और उसको परमेश्वर करके पूजा जाता है तो वह कैसे सच्चा परमेश्वर हो सकता है, क्योंकि मनुष्य द्वारा बनाई गई वस्तु एक न एक दिन नष्ट हो जाना है। यह केवल मनुष्य द्वारा की गई कल्पना और कारीगरी है। नहीं, ऐसा परमेश्वर कभी भी सच्चा परमेश्वर नहीं हो सकता जिसकी रचना मनुष्य करें।

परमेश्वर के विषय में सच्चा ज्ञान हमें केवल बाईबल में मिलता है। आईये हम पवित्र शास्त्र के कुछ वचनों का अध्ययन करते हैं:-
भजन संहित 90ः02  ‘‘इससे पहले कि पहाड़ उत्‍पन्‍न हुए, या तूने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन् अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही परमेश्‍वर है।”
01 तीमुथियुस 01ः17 “अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन॥”
भजन संहिता 102ः24 – 27  “मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे! आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है। वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा; और वह सब कपड़े के समान पुराना हो जाएगा। तू उसको वस्त्र की नाईं बदलेगा, और वह तो बदल जाएगा; परन्तु तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का।”
यशायह 57ः15 “क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यों कहता है, मैं ऊंचे पर और पवित्र स्थान में निवास करता हूं, और उसके संग भी रहता हूं, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हषिर्त करूं।’’
ऊपर लिखे पवित्रशास्त्र के वचनों से हम परमेश्वर के अनन्त वाले गुण को समझ पाते हैं कि वह अनादिकाल से अनन्तकाल तक का परमेश्वर है। जिसके आरम्भ का कोई पता नहीं है और न ही अन्त का पता है। वह अविनाशी है, अटल है, उसकी आयु का अन्त नहीं है और वह महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता है। इस प्रकार हम समझते हैं कि पवित्र शास्त्र जिस परमेश्वर का परिचय देता है वही सच्चा परमेश्वर है। ये हमारे लिये धन्यता और आशीषित बात है कि वह उनके संग भी रहता है जो खेदित और नम्र मन वाले हैं।

(2) वह अपरिवर्तनीय है: –

परमेश्वर कभी बदल नहीं सकता है वह आज, कल और युगानुयुग एक सा रहने वाला है। सच्चे परमेश्वर में यह गुण होना भी आवश्यक है कि वह कभी भी मुकरे न और हर समय एक सा रहने वाला हो। आईये पवित्र शास्त्र के कुछ वचनो से देखते हैं कि बाईबल का परमेश्वर कैसा है –

मलाकी 03ः6 ‘‘ क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए।”
गिनती 23ः19 ‘‘ ईश्वर मनुष्य नहीं, कि झूठ बोले, और न वह आदमी है, कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उसने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उस पूरा न करे?”
याकूब 01ः17 ‘‘ क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।”
हमारा परमेश्वर कभी भी नहीं बदलने वाला परमेश्वर है। यदि परमेश्वर बदलता तो याकूब के संतान अर्थात इस्त्राएली लोग नहीं बचते और न ही प्रतीज्ञा के देश में पहुंचते, जबकि उन्होंने कई बार विश्वासघात और पाप किया।
              परमेश्वर वचन देकर कभी नहीं बदलता। गिनती के अध्याय 22 से 24 तक आप अध्ययन कर सकते हैं जहां बालाक और बिलाम की घटना है। जब इस्त्राएली लोग मोआबियों के देश में डेरा डाले तब मोआब का राजा बालाक डर गया क्योंकि उसने सुना था कि इस्त्रालियों ने एमोरियों के साथ क्या क्या किया है। तब बालाक बिलाम को लेने भेजता है, क्योंकि वह जनता था कि बिलाम जिसको आर्शीवाद देता था वह धन्य हो जाता था और जिसको श्राप देता था वह श्रापित हो जाता था। बालाक, बिलाम को लालच देता है और कहता कि इस्त्राएलियों को मेरे लिये श्राप दे ताकि मोआबी लोग सुरक्षित रह सके। आप जब पढ़ेंगे तो पाएंगे कि बिलाम इस्त्राएलियों के प्रति कुछ भी बोलने से पहले परमेश्वर से पूछता था और परमेश्वर ने इस्त्रालियों के प्रति यह बोलकर कि जो आशीष के भागी हो गये हैं उन्हे शाप मत दे। इस प्रकार परमेश्वर ने बिलाम को शाप देने से मना कर दिया। बालाक के कहने पर बिलाम तीन बार परमेश्वर के पास जाता है किन्तु, परमेश्वर अपने वचन से नहीं बदला।
                 बाईबल का परमेश्वर बदलने वाला परमेश्वर नहीं है और न ही उसमें कोई परिवर्तन हो सकता है। हमारा परमेश्वर अपरिवर्तनीय परमेश्वर है। जो प्रतीज्ञा, बुलाहट और वरदान आपके लिये परमेश्वर ने रखा है वह आपको देगा, किन्तु आप धीरज धरकर इसी शर्त पर प्राप्त कर सकते हैं कि आप परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य हैं।

(3) परमेश्वर सर्वशक्तिमान है:-

परमेश्वर होने के लिये यह गुण तो होना ही चाहिये कि वह सर्वशाक्तिमान हो। आईये हम पवित्र शास्त्र में पढ़ते है:

उत्पत्ति 01ः01 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।”
                    परमेश्वर की ये सृजनात्मक सामर्थ्य है। यदि आप उत्पत्ति के 01 अध्याय को पढ़ेंगे तो वचन की सामर्थ्य को भी पाएंगे। परमेश्वर ने कहा उजियाला हो, तो उजियाला हो गया। जल के बीच में अन्तर हो, तो अन्तर हो गया। आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए तो इकट्ठा हो गया। इस प्रकार हम देखते हैं कि परमेश्वर में सृष्टि करने की सामर्थ है। परमेश्वर जो बोलता है, वह हो जाता है। मनुष्य की क्षमता है कि जो पदार्थ अस्तित्व में होता है उससे, कोई वस्तु को बनाता है परंतु परमेश्वर अस्तित्वहीनता से भी ऐसी वस्तुओं का निर्माण करता है जो सिद्ध और अच्छा है। आगे और वचनों को पढ़ेंगे।
अय्यूब 42ः02  ‘‘मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।”
भजन संहिता 33ः9 ‘‘क्योंकि जब उसने कहा, तब हो गया; जब उसने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया॥”
यिर्मयाह 32ः26-27 ‘‘तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिये कोई भी काम कठिन है?”
02 इतिहास 20ः05-06  ‘‘तब यहोशपात यहोवा के भवन में नये आंगन के साम्हने यहूदियों और यरूशलेमियों की मण्डली में खड़ा हो कर यह कहने लगा, कि हे हमारे पितरों के परमेश्वर यहोवा! क्या तू स्वर्ग में परमेश्वर नहीं है? और क्या तू जाति जाति के सब राज्यों के ऊपर प्रभुता नहीं करता? और क्या तेरे हाथ में ऐसा बल और पराक्रम नहीं है कि तेरा साम्हना कोई नहीं कर सकता?”
अय्यूब के विषय में तो आप जानते होंगे, यदि नहीं जानते तो जाने, क्योंकि अय्यूब के पास जो सहनशक्ति, धीरज और परमेश्वर के प्रति विश्वास है वह आपको झकझोर कर रख देगी। यही अय्यूब जब परमेश्वर से बात करता है तो कहता है कि वह जनता है परमेश्वर सब कुछ कर सकता है, अर्थात परमेश्वर के पास सब कुछ करने की सामर्थ है। परमेश्वर कोई युक्ति कर ले अर्थात कोई उद्देश्य या योजना बना ले तो उसे कोई रोक नहीं सकता। परमेश्वर ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर है।
भजन संहिता में भजनकार कहता है कि परमेश्वर ने जो-जो कहा सब अपने आप होता चला गया क्योंकि परमेश्वर के पास वचन की सामर्थ है और यही वचन की सामर्थ परमेश्वर ने अपने पुत्र यीशु मसीह के द्वारा प्रत्येक विश्वासी को दिया है।
               भविष्यद्वक्ता यिर्मयाह के पास भी परमेश्वर का वचन पहुंचा अर्थात परमेश्वर ने अपना परिचय दिया कि वह सब प्राणियों का परमेश्वर है और उसके लिये कोई भी काम कठिन नहीं है। मेरे प्रियों परमेश्वर का सामना कोई नहीं कर सकता।

(4) परमेश्वर सभी स्थानों पर एक ही समय उपस्थित रहता है :-

परमेश्वर सर्वव्यापी है, अर्थात परमेश्वर सभी स्थानों पर एक ही समय में उपस्थित रहता है। आईये पवित्र शास्त्र से कुछ वचनों को देखते हैं:-

भजन संहिता 139ः6-12‘‘यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है॥ मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं॥”
यिर्मयाह 23ः24‘फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं ?”
             मेरे प्रियों पवित्र शास्त्र जिस परमेश्वर का परिचय देता है वही सच्चा परमेश्वर है। हम परमेश्वर से कभी भी छिप नहीं सकते और न ही हमारे विचार, चाल-चलन और कार्य छिप सकते हैं। भजनकार कहता है हम परमेश्वर के आत्मा से कहीं भाग नहीं सकते, आकाश में, अधोलोक में, समुद्र के पार, अन्धेरे में सब जगह परमेश्वर का आत्मा है।
भविष्यद्वक्ता यिर्मयाह को भी परमेश्वर स्वंय अपने बारे में कहता है कि क्या कोई गुप्त स्थान है जहां मनुष्य परमेश्वर से छिप सकता है। स्वर्ग और पृथ्वी दोनो परमेश्वर से परिपूर्ण है अर्थात दोनो जगह परमेश्वर है। अपने जीवन में परमेश्वर का भय और आदर करें और हर समय इस विवेक के साथ जीवन यापन करें कि आपको हर समय परमेश्वर देख रहा है।

(5) परमेश्वर सर्वज्ञानी है:-

परमेश्वर के पास सब ज्ञान है। परमेश्वर से कुछ भी छिपा नहीं है। आईये पवित्र शास्त्र के कुछ वचनों को देखते हैं:-
01 इतिहास 28ः09 ‘‘और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा।”
02 इतिहास 16ः09 “देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा।”
भजन संहिता 94ः11 ‘‘यहोवा मनुष्य की कल्पनाओं को तो जानता है कि वे मिथ्या हैं॥”
दानिय्येल 02ः20 ‘‘परमेश्वर का नाम युगानुयुग धन्य है; क्योंकि बुद्धि और पराक्रम उसी के हैं।”
यशायाह 40ः28 ‘‘क्या तुम नहीं जानते? क्या तुमने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्‍वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।”
यहेजकेल 11ः5 ‘‘तब यहोवा का आत्मा मुझ पर उतरा, और मुझ से कहा, ऐसा कह, यहोवा यों कहता है, कि हे इस्राएल के घराने तुम ने ऐसा ही कहा हे; जो कुछ तुम्हारे मन में आता है, उसे मैं जानता हूँ।”
              परमेश्वर सर्वज्ञानी है। मनुष्य के मन में जो कुछ विचार उत्पन्न होते हैं वह समझ लेता है। मेरे प्रियों क्या कोई किसी के विचार जान सकता है ? भले ही कितना ही घनष्ठि हो, माता-पिता हो, भाई-बहन हो, पति-पत्नी हो, मित्र हो आपस में एक-दूसरे के विचार जो मन में उत्पन्न होते हैं नहीं जान सकते । परमेश्वर ही अंतरयामी है, जो सब कुछ दूर ही से समझ लेता है। बाईबल बताती है कि परमेश्वर की दृष्टि सारी पृथ्वी पर घूमती है, और जिसका मन परमेश्वर के प्रति निष्कपट रहता है, परमेश्वर उसकी सहायता करने के लिये अपना सामर्थ्य प्रगट करता है। इसलिये हर समय प्रार्थना में मांगे कि हमारा मन शुद्ध हो, अच्छा विवेक हो और परमेश्वर के प्रति निष्कपट विश्वास से ही प्रेम उत्पन्न हो। परमेश्वर की बुद्धि अगम है। मनुष्य के विचार और परमेश्वर के विचार में जमीन आसमान का अंतर है।
परमेश्वर आपको आशीष दे।
आमीन।

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